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बिहार में जनता दरबार का अमल: आदेश तो है, जमीन पर असर नजर नहीं

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बिहार में सरकार की पहल के तहत राज्यभर में प्रखंड स्तर से लेकर कमिश्नरेट तक तथा थाना स्तर से लेकर पुलिस कमिश्नर तक जनता दरबार का आयोजन नियमित रूप से किया जाता है। इन जनता दरबारों के माध्यम से आम नागरिक सीधे अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायतें और समस्याएँ रख सकते हैं और प्रशासन की ओर से त्वरित समाधान के आदेश भी जारी होते हैं। बिहार सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से शासन-प्रशासन और जनता के बीच संवाद मजबूत होगा और समस्याओं का शीघ्र निवारण सुनिश्चित होगा।
हालांकि, वास्तविक स्थिति जमीन स्तर पर बहुत अलग दिखाई दे रही है। आम लोगों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक आदेश और निर्देश तो उच्च अधिकारियों की ओर से लगातार दिए जाते हैं, लेकिन निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मियों तक उनका प्रभाव सीमित नजर आता है। शिकायतों का निवारण अक्सर लंबित रह जाता है और जनता को लगता है कि उनके सामने केवल कागजी कार्रवाई होती है। चाहे वह पुलिस के आला अधिकारी हों या सिविल प्रशासन के उच्च अधिकारी, आदेश तो जारी होते हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका प्रत्यक्ष असर या समाधान कम ही दिखता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता दरबारों का आयोजन औपचारिकता बनकर रह गया है। अधिकारी उच्च स्तर पर रिपोर्ट तैयार कर देते हैं और आदेश देते हैं, लेकिन जमीन पर उनका अनुपालन अक्सर धीमा या अधूरा रहता है। इसी कारण आम जनता में प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक प्रक्रिया को लेकर निराशा बढ़ रही है।
विशेषज्ञों और प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जनता दरबार की प्रभावशीलता बढ़ाने के लिए सख्त निगरानी और स्थानीय स्तर पर नियमित फॉलो-अप आवश्यक है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि आदेश केवल कागज पर न रह जाएं, बल्कि स्थानीय स्तर पर समस्याओं का वास्तविक समाधान हो। इसके साथ ही नागरिकों को भी सक्रिय भागीदारी और अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहना होगा ताकि यह व्यवस्था उद्देश्य की पूर्ति कर सके।
बिहार में जनता दरबार का यह अंतर सिर्फ एक प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मजबूती और आम जनता के विश्वास का मुद्दा भी बन गया है। राज्य सरकार और उच्च अधिकारियों के लिए अब यह आवश्यक है कि वे केवल आदेश देने तक सीमित न रहें, बल्कि जमीन पर उसकी सच्चाई और क्रियान्वयन पर कड़ी नजर रखें, ताकि जनता दरबार का वास्तविक लाभ आम नागरिकों तक पहुँच सके।

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